Ghaziabad 3 Girls Suicide: ऑनलाइन गेमिंग की लत में 3 लड़कियों ने किया सुसाइड; 9वीं मंजिल की बालकनी से कूदकर जान दी

खौफनाक! ऑनलाइन गेमिंग की लत में 3 लड़कियों ने किया सुसाइड; 9वीं मंजिल की बालकनी से कूदकर जान दी, तीनों सगी बहनें थी

Ghaziabad 3 Girls Suicide

Ghaziabad Three Minor Sisters Suicide Due To Online Gaming Addiction

Ghaziabad 3 Girls Suicide: सावधान हो जाइए और अपने बच्चों को बचा लीजिए। वरना आपके बच्चे जान द देंगे। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद से सामने आई एक घटना ने दिल-दिमाग को हिला दिया है और डराकर रख दिया है। यहां रात 2 बजे के करीब ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते 3 नाबालिग लड़कियों ने सुसाइड कर लिया। तीनों ने 9वीं मंजिल की बालकनी से कूदकर जान दी। तीनों ही लड़कियां सगी बहनें थीं। जिनकी पहचान निशिका (16 साल) प्राची (14 साल) और पाखी (12 साल) के रूप में बताई जा रही है। तीनों बच्चियों के इस खौफनाक कदम से घर-परिवार में हाहाकार मचा हुआ है।

मौके पर पहुंची थी पुलिस

इन 3 नाबालिग लड़कियों के 9वीं मंजिल से कूदने और सुसाइड किए जाने की सूचना पर गाजियाबाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। जिसक बाद खून से लथपथ तीनों लड़कियों को एंबुलेंस में अस्पताल लोनी भेजा गया। जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। तीनों ही लड़कियों की मौत मौके पर ही हो चुकी थी। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच के साथ बनती कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि ये परिवार गाजियाबाद के भारत सिटी बी-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 में रहता था। जहां 9वीं मंजिल पर इसी फ्लैट की बालकनी से तीनों बच्चियों ने छलांग लगाई और अपनी जान दे दी।

परिवार ने गेम खेलने से किया था मना

बताया जा रहा कि तीनों बहनें एक टास्क बेस्ड ऑनलाइन कोरियन गेम खेलती थीं। उन्हें गेमिंग की इतनी बुरी लत लगती जा रही थी की उनका व्यवहार भी अलग सा हो गया था। बताया जाता है कि लड़कियों को जिस गेम की लत थी उसमें कई जानलेवा और टार्चर करने वाले टास्क भी दिये जाते हैं। इधर परिवार ने जब इस गेम को खेलने से बच्चियों को मना किया और डांटा। जिसके बाद ही तीनों लड़कियों ने रात में सुसाइड कर लिया। जानकारी मिल रही है कि लड़कियों ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है, जिसमें कहा है कि ''मम्मी-पापा सॉरी, अब पता चलेगा की हम गेम से कितना प्यार करते थे?'' वहीं गेम में लड़कियों को डेथ चैलेंज दिए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है।

बचा लीजिए अपने बच्चों को

वास्तव में गाजियाबाद की ये घटना न सिर्फ डराने वाली है बल्कि हमारे बच्चों को लेकर बेहद चिंताजनक स्थिति पैदा करने वाली भी है। ये घटना एक वेक-अप कॉल भी है कि हम मोबाइल और इंटरनेट-सोशल मीडिया के दलदल में फंसे अपने बच्चों को कैसे बाहर निकालें। क्योंकि बच्चे कब इस तरह के ऑनलाइन गेम में फंस जाते हैं, हमें पता ही नहीं चलता। और जब तक पता चलता भी है तो फिर कुछ किया नहीं जा सकता। आज यह हर एक घर की बड़ी समस्या बनती जा रही है की छोटे-छोटे बच्चे मोबाइल के आदी हो रहे हैं।

फिलहाल भारत में नाबालिगों के सोशल मीडिया/स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करना होगा। हम अपने बच्चों के दिमाग़ को टेक कंपनियों का चारागाह नहीं बना सकते। जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस ने 15-16 साल तक के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए कानून बना दिए हैं, उसी तरह से भारत सरकार को भी जागने की जरूरत है। वरना स्थिति भयावह हो जाएगी। लेकिन हमारे यहां तो हाल ही में आए बजट में कंटेंट क्रिएटर लैब्स खोलने की घोषणा की गई है। मतलब क्या ही कहा जाये।